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बच्चों में कला, इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि जगाने के 4 आसान तरीके

बचपन में हम में से अधिकांश लोगों को इतिहास एक बड़ा ही नीरस विषय लगता था। परीक्षाओं के भय से हम राजाओं और साम्राज्यों की लम्बी-लम्बी सूचियाँ रट तो लेते थे, लेकिन परीक्षा के अगले ही दिन उसे भूल भी जाते थे। इसके बावजूद हमें ऐतिहासिक स्थलों पर घूमना और बड़े-बड़े महलों को देखना अत्यंत पसंद होता है। मुग़ल-ए-आज़म जैसी इतिहास पर आधारित चलचित्र जब भी टीवी पर आते हैं, हम उन्हें देखना नहीं भूलते। फिर भी हमारे समाज में, इतिहास, संस्कृति और कला के अध्ययन के प्रति एक निराशावादी सोच क्यों है?

ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिकांश लोग इतिहास सिर्फ़ पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ते हैं, और पाठ्यपुस्तकें, जनसाधारण को इतिहास की सिर्फ़ प्राथमिक शिक्षा देने का ही काम करतीं हैं। परंतु इतिहास सिर्फ़ राजाओं के नामों की लम्बी-लम्बी सूचियाँ ही नहीं है, बल्कि एक देश और एक समाज के विकास की कहानी भी है, ये सामाजिक दलों के बीच के संघर्ष की भी कहानी है और ये विचारधाराओं के टकराव की भी कहानी है। बच्चों में इस समझ को पैदा करने में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका बहुत बड़ी है। परीक्षाओं में नम्बर लाने की दौड़ में यह समझ कहीं पीछे छूट सी जाती है। आज के वैश्वीकृत समाज में, जहां विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग साथ में काम करते हैं, वहाँ इतिहास की ऐसी समझ हमें अपने से अलग लोगों के प्रति सहिष्णु बनाती है।

इस लेख में हम आपको 4 आसान तरीके बताएँगे जिससे आप बच्चों में इतिहास, संस्कृति और कला के प्रति रुचि बढ़ा सकते हैं:

  • बच्चों को ऐतिहासिक चलचित्र एवं वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) दिखाएं: 
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अधिकांश बच्चों को इतिहास बड़ा ही नीरस लगता है और इस विषय को रुचिकर बनाना, शिक्षकों और अभिभावकों, दोनो के लिए एक बड़ी चुनौती है। पाठ्यपुस्तकों में इतिहास की बड़ी-बड़ी घटनाएं सिर्फ़ एक तारीख़ मात्र बन कर रह जाती हैं। बच्चे कभी भी उस घटना के पीछे के सामाजिक या राजनीतिक कारण ठीक से नहीं समझ पाते। ऐतिहासिक घटनाओं पर बनी चलचित्र,वृत्तचित्र इन पहलुओं पर ज़्यादा प्रकाश डालती हैं। ऐसी चलचित्र या वृत्तचित्र को दिखाने के बाद आप अपने बच्चों से उन घटनाओं के बारे में वार्तालाप करें और उसे उनके पाठ्यपुस्तकों से जोड़ने की कोशिश करें। इससे बच्चें ऐतिहासिक घटनाओं को बेहतर समझेंगे और याद भी रख पाएँगे।

  • बच्चों को कोई विदेशी भाषा सीखने को प्रेरित करें:
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किसी भी देश की भाषा उसके समाज का एक प्रतिबिंब होता है। जिस भी देश की भाषा हम सीखते हैं, हम उसकी संस्कृति को बेहतर समझ पाते हैं। जो बच्चे बहुभाषी होते हैं, उनमें कई संस्कृतियों की अच्छी समझ होती हैं। बहुभाषी होने से बच्चे बहिर्मुखी बनेंगे और आज की वैश्वीकृत दुनिया के लिए बेहतर तैयार होंगे।

उदाहरण के तौर पर, अधिकांश लोग पूर्वी एशियाई देशों के विषय में बहुत कम जानते हैं और इस इन देशों के प्रति एक रूढ़िवादी विचारधारा के शिकार होते हैं। इसके उत्तरदायी काफी हद तक हमारी इतिहास की पाठ्यपुस्तकें हैं जिनमें हम सिर्फ़ इन देशों के युद्धों की तिथियों को याद करते ही रह जाते हैं। इन देशों की भाषा सीखने से बच्चे वहाँ की संस्कृति के कई आयाम समझेंगे जैसे टी-सेरेमनी, एक दूसरे को झुक कर अभिवादन करना (बो करना), इत्यादि।

  • विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक चित्रों से बच्चों का परिचय करवाएँ :
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अधिकांश इतिहास की किताबें समय के साथ कलाओं के बदलते स्वरूप पर ज़्यादा प्रकाश नहीं डालती। पाठ्यपुस्तकों में कुछ श्वेत-श्याम तस्वीर होती ज़रूर हैं लेकिन इससे बच्चे पूरी तरह उस कलाकृति की सुंदरता को समझ नहीं पाते। इसके लिए आप को महंगी-महंगी विश्वकोश (एन्साइक्लोपीडिया) खरीदने की आवश्यकता नहीं। इंटरनेट पर, आपको आसानी से इतिहास से जुड़ी कई रंगीन तस्वीरें मिल जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, गूगल पर “वारली आर्ट” खोलें और जो चित्र बच्चों को पसंद आए उसे उन्हें खुद बनाने बोलें। विकिपीडिया पर वारली आर्ट के बारे में पढ़कर बच्चों को छोटी-छोटी कहानियां भी सुनाएं। ऐसे अभ्यासों से कला के विभिन्न स्वरूपों के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ेगी।

  • बच्चों को संग्रहालय (म्यूजियम) घुमाने ले जाएँ:

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    (Description: By unknown Indus Valley Civilization sealmaker from Mohenjodaro archaeological site. Public Domain, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=9325528)

    इतिहास की किताबों में पढ़ी हुई अधिकांश चीजें हम भूल जाते हैं। लेकिन उन किताबों के कई चित्र हमारे मानस पटल पर अंकित हो जाते हैं। हमारे शहरों के विभिन्न संग्रहालय ऐसे चित्रों और कलाकृतियों का एक अनमोल खजाना हैं। इस महामारी के दौर में हम अपने बच्चों को संग्रहालयों का वर्चुअल टूर दिखा सकते हैं। इससे बच्चे किसी भी कालखंड की अनमोल सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित होंगे। इसके लिए आप इंटरनेट पर विभिन्न संग्रहालयों की वेबसाइटों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    उदाहरण के तौर पर, जब आपका बच्चा प्राचीन भारतीय सभ्यता का पहला अध्याय पढ़ रहा हो, तो आप उसे भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय की वेबसाइट ज़रूर दिखाएँ। संग्रहालय में प्रदर्शित चित्रों और कलाकृतियों के बारे में उनके साथ चर्चा करें। इससे इतिहास, संस्कृति और कला के प्रति बच्चों की उत्सुकता बढ़ेगी और वे अपनी किताबों में दिया गया ज्ञान बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

    कला, इतिहास और संस्कृति की समझ आज की वैश्वीकृत दुनिया में एक अनिवार्य कौशल है। आने वाले समय में, आज से और भी अधिक भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, प्रांतों और देशों के लोग एक साथ काम करेंगे। बचपन से ही विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं की जानकारी होना, भविष्य में हमारे बच्चों को लाभान्वित करेगा। हम यह आशा करते हैं कि इस लेख़ को पढ़कर आप अपने बच्चों में इतिहास, संस्कृति और कला के प्रति संवेदनशीलता ज़रूर जगाएँगे।

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Rahul Kabra

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